mutual fund kaise chune-म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें-म्यूचुअल फंड का भविष्य

mutual fund kaise chune-म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें-म्यूचुअल फंड का भविष्य

दोस्तों आज हम म्यूच्यूअल फण्ड के महत्वपूर्ण टॉपिक के बारे में जानने वाले हैं जिसमे आज मैं आपको म्यूच्यूअल फण्ड कैसे चुना जाता है , कौन सा mutual फण्ड बेहतर होगा और बेकार रिटर्न देने वाले फण्ड कौन से आदि की पूरी जानकीरी आपको मिलेगी इसलिए पूरा लेख जरूर पढ़े ।

क्या ?? म्यूच्यूअल फंड्स सही है

किसी भी बढ़िया निवेश के क्षेत्र में जाने से पहले यह जानना जरुरी हो जाता है की आप निवेश क्यों , कितने समय , आपको वहां से बाहर निकलने का लक्ष्य क्या होगा आदि यह सब पहले से तय करना जरुरी हैं । इससे आपको फ्यूचर में फैसले लेने में आसानी होती है  और निवेश यदि लम्बे समय के लिए हो तो मुनाफा पक्का है ।

हाँ यह बात सच है की mutual fund में किसी दूसरे क्षेत्र को छोड़ शेयर मार्किट की तरह  रिस्क भरा हो सकता है इसलिए आपको invest  करने से पहले आपके जोखिम का भी पता होना बहुत जरुरी हैं ताकि आपके इन्वेस्टमेंट में पारदर्शिता आ सके ।

म्यूच्यूअल फण्ड चुनने का तरीका जानने से पहले एक महत्वपूर्ण टॉपिक पर आपका ध्यान खींचना चाहता हूँ की कभी भी किसी एक mutual fund अपने सारे पैसे इन्वेस्ट ना करे बल्कि बहुत अलग – अलग केटेगरी के मूअल फण्ड मौजदू है उन्हें चुनना बेहतर होगा ।

ताकि जब कोई म्यूच्यूअल फंड्स परफॉर्म ना करे तब आपके द्वारा लिया गया दूसरे केटेगरी का फण्ड जरूर बढ़िया परफर्म करेगा । यदि आप म्यूच्यूअल फण्ड में sip की सुविधा चालू करते है  तो आपका रिस्क और भी कम हो जाता हैं । इसके अलावा और भी कई सारे तरिके है  जिसके बारे हम आगे जाननेवाले हैं तो चलिए सुरु करते हैं ।

म्यूचुअल फंड में निवेश – कैसे करे ??

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वैसे तो आपको निचे इमेज में दी गयी 5 सबसे आसान रिके को अपनाकर भी अपना बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड चुन सकते हैं लेकिन इसके अलावा भी मैं आपको और भी ढेर सारे तरिके बताऊंगा जिससे आपको म्यूच्यूअल फण्ड चुनने में आसानी होगी ।

1 ) अपना टारगेट चुने 

जैसा की मैंने पहले बता दिया हैं आपको अपना गोल पहले से तय करना होता है की आप अपने इन्वेस्टमेंट पर कितना रिटर्न पाना चाहते हैं । इसे निकलना बेहद आसान हैं मान लीजिये कोई म्यूच्यूअल फण्ड सालाना 15 % का रिटर्न दे रही हैं और आपको उस म्यूच्यूअल फण्ड से 60% का मुनाफा चाहिए तो आपका कम से कम 4 साल तक जरूर बने रहना चाहिए इस तरह आप अपने टारगेट या गोल को प्राप्त कर सकते हैं ।

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बहुत कम ऐसे लोग है जो 4 साल तक का इंतजार करना पसंद करते हैं इसलिए यदि आपका इन्वेस्ट करने का समय सिमा कम है या मान लीजिये 1 से 2 साल के लिए हैं तो आपको डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड या फिर लिक्विड म्यूच्यूअल फण्ड के साथ जाना बेहतर विकल्प हैं नहीं तो आपका टारगेट 5 से 10 साल तक है तो आप हाई रिस्क फण्ड या इक्विटी फण्ड के साथ जा सके है ।

2 ) फण्ड मैनेजर 

अक्सर लोग केवल फण्ड का ही एनालिसिस करते है जबकि म्यूच्यूअल फण्ड को संचालि करने वाले fund manger को भी परखना जरुरी हैं क्योंकि किसी भी फण्ड के लिए उसको चलानेवाला का योग्यता , अनुभव , एजुकेशन आदि बहुत मायने रखता हैं ।

और यह सभी सुविधा आप अपने रेजिस्टर्ड म्यूच्यूअल फण्ड की वेबसाइट पर आसानी से देख सकते हैं जिसमे पता चलता है की फण्ड मैनेजर अभी कितने फण्ड को मैनेज कर और उस फण्ड का रैसोंसे कैसा हैं ।

mutual fund kya hota hai in hindi what is sip investment in hindi

 

3 ) रिस्क मैनेजमेंट(mutual fund kaise chune-म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें-म्यूचुअल फंड का भविष्य-2)

जहाँ तक रिस्क की बात है तो यह भी दो तरह से आपको परखना पड़ेगा की यदि आप कहीं गलती से किसी गलत म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट कर बैठे है किसी दूसरे की तुलना में लोस्स में है तो आप उसमे कितना लोस्स यानी की रिस्क ले सकते है

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दूसरा यह है की आप किस तरह के इन्वेस्टर है यानी की यदि आप ज्यादा अग्रेसिव इन्वेस्टर है तो निश्चित ही आपको स्माल कैप फण्ड या फिर mid cap fund के साथ जाना बेहतर है क्योंकि इसमें रिस्क ज्यादा होने के साथ आपका पैसा दुगना करने की क्षमता भी रखते है

यदि रिस्क कम लेना चाहते है तो आपको निश्चित ही किसी large cap fund या debt mutual fund में निवेश करना चाहिए । यदि आप किसी small cap fund और large cap fund को आपस में तुलना करे तो रिटर्न का लेखा जोखा आपको सामने दिख जायेगा

4 ) समय अवधि 

यदि आप पैसा जमा कर रहे है तो इसका मतलब यह बनता है की आप फ्यूचर में कुछ न कुछ टारगेट सेट किया हुआ है ताकि इन जमा किये गए पैसो को उनमे लगा सके ठीक उसी प्रकार आप म्यूच्यूअल फण्ड में में अपना समय सिमा चुन सकते हैं और उसके आधार पर तरह तरह के म्यूच्यूअल फण्ड में पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं ।

म्यूच्यूअल फण्ड का आधा से अधिक पैसा शेयर मार्किट में इन्वेस्ट किया जाता है इसलिए उसका मार्किट बहुत ज्यादा अस्थिर रहता हैं इसलिए 3 दिन से 3 महीने के लिए आप किसी लिक्विड फण्ड को चुने

, 3 महीने से 1 साल के लिए ultra short term fund , 1 से 5 साल के लिए hybrid fund या balanced fund और  5 साल से ऊपर का है तो इक्विटी फण्ड में इन्वेस्ट करे 

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5 ) फण्ड का परफॉरमेंस(mutual fund kaise chune-म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें-म्यूचुअल फंड का भविष्य)

आपको बता दे की कोई भी म्यूच्यूअल फण्ड का पिछले साल का प्रदर्शन उसका फ्यूचर के रिजल्ट को निर्धारित नहीं कर सकती हैं फिर भी बावजूद इसके आपको पिछले पर्दशन पर भी जरूर ध्यान देना चाहिए ।

आप को इससे एक लाभ यह हो सकता है की जॉब पिछले परफॉरमेंस को देखते है तब उसी केटेगरी के ढेर सारे म्यूच्यूअल फण्ड की लिस्ट सामने आ जाएगी जिसका पिछले परफॉरमेंस की तुलना करके आप सही mutual fund चुन सकते हैं ।

म्यूच्यूअल फण्ड का प्रदर्शन बहुत मायने रखता हैं इसलिए उसके कम से कम  साल का रिकॉर्ड जरूर चेक करे लेकिन यहां एक दिक्कत आपको आ सकती हैं जो हो सकता है 2020 महामारी के दौरान आपके चुने गए फण्ड में गिरावट दिखे जैसा की सब फण्ड में दिखाई देगा इसलिए इस टॉपिक को भी जरूर ध्यान दे ।

6 ) फण्ड का AUM 

फण्ड का साइज भी म्यूच्यूअल फण्ड में बहुत मायने रखता हैं क्योंकि जो म्यूच्यूअल फण्ड लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे है तो जाहिर है की उसका AUM यानि की asset under management भी बढ़ता चला जाता है ।

यह AUM उस फण्ड टोटल मार्किट एसेट है जो उसे मैनेज करने का काम करता हैं इसलिए मान लीजिये कोई फण्ड का AUM 2010 से 2105 के अंदर 1000 करोड़ रूपए था लेकिन 2011 से 2015 तक उसका AUM कपिटल 1200 करोड़ ही रहा ।

इसका मतलब यह हुआ की लोग अब उस फण्ड में कोई रूचि नहीं दिखा रहे हैं इसलिए आपका जो भी टारगेट है उस समय तक वह अब सायद बढ़िया मुनाफा ना दे या फिर प्रॉफिट आधा ही हो सके इसलिए आप फण्ड के साइज का भी जरूर ध्यान रखें ।

सबसे बेस्ट म्यूच्यूअल फण्ड कौन सा है sbi sip mutual fund plans in hindi

7 ) फ़ीस और फाइन 

म्यूच्यूअल फण्ड कंपनी अपने निवेशक के फण्ड से ही अपना खर्चा वह करती हैं जो की बहुत कम होता हैं । अतः हम इसे एक्सपेंस रेश्यो के नाम से जानते है इसलिए जिस फण्ड का एक्सपेंसेस रेश्यो जितना कम होगा आपसे उतना ही कम चार्जेज देने पड़ेंगे ।

इसलिए फण्ड चेक करते समय उसका एक्सपेंसेस अनुपात भी जरूर चेक करे । अब बात करते है एग्जिट लोड की जो निवेशक द्वारा समय से पहले म्यूच्यूअल फण्ड क्लोज करने पर फाइन किया जाता हैं ।

मान लीजिये आपका इन्वेस्ट करने का लक्ष्य 2 साल का है लेकिन आप 1 साल के अंदर ही बहार निकलना चाहते है तो आपके nav पर 1 से 10 % तक एग्जिट लोड काटा जा सकता है इसलिए ऐसे में एग्जिट लोड और अन्य चार्जेज भी जरूर चेक करे ।

8 ) परफॉरमेंस अथवा रेटिंग 

आपकी जानकारी के लिए बता दे की भारत में CRISIL , ICRA , MORNING STAR , VALUE RESEARCH आदि जैसी नामी एजेंसियां द्वारा म्यूच्यूअल फण्ड को रेटिंग उनके पिछले परफॉरमेंस और कई तरह के मापदंड के बाद रेटिंग देती है ।

इसलिए आप रेटिंग को ध्यान में रखते हुए म्यूच्यूअल फण्ड को चुनना सुरु करे तो आपको बिना ज्यादा वक़्त लगाए एक बढ़िया म्यूच्यूअल जड़ ही मिल सकता हैं और उसके फ्यूचर में लाभ देने का चांस भी अधिक रहता है ।

अब ऐसा भी नहीं है की केवल रेटिंग के आधार पर आप कोई फण्ड को चुने यह गलत निर्णय है बसर्ते इसके बताये गए सभी टॉपिक को भी  जरूर चेक करे । आपको बता दे की यदि आप कम रेटिंग वाले का पिछले परफॉरमेंस चेक करेंगे तो आपको फर्ख पता चल जायेगा तभी उनमे रेटिंग कम देखने को मिलता इसलिए यदि कोई म्यूच्यूअल फण्ड 4 से 5 स्टार में है तो सबसे बेस्ट है ।

लिक्विड फंड क्या है??

9 ) म्यूच्यूअल फण्ड कितना पुराना है 

किसी भी म्यूच्यूअल फण्ड की उम्र देखना बहुत जरुरी हैं अगर फण्ड का उम्र 2 से 4 साल पुराण हो तो सबसे बढ़िया माना जाता है क्योंकि उस फण्ड को विश्लेषण करने में आसानी होती है जो की नए फण्ड में ऐसा नहीं हो पता जिससे हमारा रिस्क थोड़ा बढ़ जाता हैं और हो सके तो NFO यानी की नई फण्ड ऑफर से दुरी जरूर बनाये ।

10 ) म्यूच्यूअल फण्ड का रिस्क और रिटर्न 

म्यूच्यूअल फण्ड में भी रिस्क और रिटर्न के अनुपात को देखना बहुत जरुरी हैं यानी की किसी केटेगरी का कोई म्यूच्यूअल फण्ड अपने रिस्क और रिटर्न दोनों के तालमेल में फिट है या नहीं यदि नहीं है तो हम उन फण्ड की लिस्ट बनाएंगे और उनमे सबसे अच्छा रिस्क और रिटर्न वाले ही फण्ड को चुनेंगे  ।

11 ) फण्ड का इंडेक्स से सम्बन्ध 

अब अंत में हम किसी भी म्यूच्यूअल फण्ड की तुलना उसके बेंचमार्क से करेंगे ताकि हमे उस म्यूच्यूअल फण्ड का मानक या सैंडर्ड का पता चल सके । मान लीजिये कोई म्यूच्यूअल फण्ड बैंकिंग शेयर से जुडी है तो हमे पिछले 5 साल का तुलना उस बैंकिंग इंडेक्स एवं म्यूच्यूअल फण्ड से करेंगे ।

इससे आपको यह पता आसानी से लग जायेगा की क्या वह फण्ड अपने उद्देस्य के अनुसार परफॉरमेंस दे अहा है या नहीं यदि फण्ड और बेंचमार्क इंडेक्स दोनों बराबर है तो यह संभावना ज्यादा हो सकती है की वह बेंचमार्क से आगे निकल जाए ।

12 ) पोर्टफोलिओ 

यह सुविधा सभी में दी जाती हैं जिसमे आप लिए हुए सभी म्यूच्यूअल फण्ड का परफॉरमेंस को देख सकते हैं जिसके अंदर प्रॉफिट , लोस्स , फण्ड की सूचि , एग्जिट ऑप्शन , आदि पर फैसला ले सकते हैं ।

डेट फंड क्या है

म्यूचुअल फंड का भविष्य

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आने वाले कुछ सालों में म्यूच्यूअल फण्ड का भविस्य एक दम से ग्रो किया है इसलिए इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की इसकी सुरुवा 1960 के दसक में की गयी थी तब इसकी कुल aum फंड्स 6700 करोड़ रूपए थी लेकिन 2016 में हुए एक शोध के अनुसार यह फण्ड बढ़कर 15.63 ट्रिलियन रूपए हो चूका था ।

म्यूच्यूअल फण्ड ( AMF ) को अभी तक चार चरण से गुजरना पड़ा है और यह कदम सिर्फ निवेशक के जमा पैसों को सुरक्षित बनाये रखने के लिए उठाया गया क्योंकि इतना बड़ा रकम की देख रेख करना  कोई आसान काम नहीं हैं ।

पहला चरण 

यह चरण 1964 से लेकर 1987 तक चला था जिसमे UTI के पास 6700 करोड़ रूपए AUM आ चुकी थी । इन्ही सालों के अंदर इस फण्ड में बहुत से बदलाव किया गए जिसमे इस फण्ड को RBI से अलग कर दिया गया ।

तब यह म्यूच्यूअल फण्ड UTI के नाम से जाना जाता था जिसका मुख्य उदेस्य छोटे से छोटे निवेशक को अपनी तरफ खींचना था । जब इसकी सुरुवात की गयी थी तो इसकी देख रेख RBI के पास थी जो 1978 में उससे अलग कर दी गयी और नियत्रण का जिम्मा रेगुलेटरी और एडमिनिस्ट्रेटिव को दे दिया गया था ।

दूसरा चरण 

साल 1987 से लेकर 1993 तक चला था जिसमे PUBLIC SECTOR फण्ड की सुरुवात की गयी । इन समय के दौरान बहुत से बैंक को MUTUAL FUND बनाने का मिल गया था । इसी समय SBI BANK ने अपना पहला NONUTI फण्ड का निर्माण किया था ।

साल 1993 में यह चरण समाप्त कर दिया गया और एक रिपोर्ट के मुताबिक इन सालों में aum यानी की ASSET UNDER MANAGEMENT FUNDS कहीं ज्यादा बढ़कर 6700 करोड़ से बढ़कर 47004 करोड़ रूपए बन चुके थे ।

तीसरा चरण(mutual fund kaise chune-म्यूचुअल फंड का भविष्य)

यह चरण 1993 से सुरु होकर 2003 तक चला था जिसमे PRIVATE SECTOR फण्ड को भी मंजूरी दे दी गयी जिससे इसका अकार लगातार बढ़ता चला गया और निवेशकको भी ज्यादा से ज्यादा विकल्प मिलने लगे ।

चौथा चरण 

यह चरण 2003 से सुरु होकर अभी तक चला आ रहा हैं जिसमे बहुते सारे उतार चढ़ाव देखें है जिसमे 2009 की आर्थिक मंदी के साथ 2020 में आये कोरोना महामारी को भी झेला है । 2003 में इसे दो भाग में बांटा गया जिसमे पहला का नाम SUUTI और दूसरा UTI MUTUAL FUND जो सीधे तौर पर SEBI द्वारा कंट्रोल किया जाता है ।

2009 और 2020 की मंदी में निवेशक को बहुत नुक्सान हुआ था जिसमे इसकी संख्या भी घटी थी लेकिन MUTUAL FUND ने समय रहते एक नया रिकॉर्ड कायम करता गया साल 2016 में सबसे ज्यादा AUM वाली फण्ड बन चुकी थी जिसने  15.63 ट्रिलियन रूपए एजथता कर चूका था ।

अब आज के समय में यह इतना तरक्की पर है की इसका भविष्य उज्जवल दिखाई दे रहा है क्योंकि इसमें निवेशक की कुल संख्या 5 करोड़ के ऊपर है और हर महीने लाखों की संख्या में निवेशक जुड़ते ही जा रहे हैं ।

निष्कर्ष (mutual fund kaise chune-म्यूच्यूअल फण्ड कैसे खरीदें-म्यूचुअल फंड का भविष्य)

दोस्तों आशा करता हूँ की आपको मेरा यह लेख म्यूच्यूअल फण्ड कैसे ख़रीदे बहुत पसंद आया होगा जिसमे मैंने म्यूच्यूअल फण्ड के खरीदने के तरिके को आसान भाषा में समझाया हैं यदि पके कोई सवाल है तो उन्हें कमेंट में जरूर पूछे जिसका उत्तर जल्द से जल्द देने का प्रयाश किया जायेगा धन्यवाद ।

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