kamiya meaning in english-kamiya in english-नई शिक्षा नीति 2020 की कमियां

kamiya meaning in english-kamiya in english-नई शिक्षा नीति 2020 की कमियां

दोस्तों सबसे पहले kamiya name meaning को इंग्लिश में क्या कहता हैं इसको जानेंगे फिर इसके बाद हम हमारे भारत में नई शिक्षा निति के बारे में चर्चा करेंगे जिसमे मुख्य रूप से कमी को खोजने का प्रयाश करेंगे जो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं ।

  • what does kamiya mean

kamiya को इंग्लिश में drawbacks कहा जाता हैं लेकिन इसे हिंदी मेकै नाम से पुकारा जाता हैं जिसमे अभाव , कमी , घाटा , नुक्सान , खोट , न्यूनता आदि के नाम से भी भी पुकारा जाता हैं । जिसे हम इंग्लिश में reduction , decraese , shortage , cut , abatement आदि के नाम से भी जानते हैं ।

उम्मीद है की आपको kamiya meaning का पता लग चूका होगा लेकिन हम इसे कैसे वर्ड में शामिल करे जिससे की पता चल सके क आखिर कैसे इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है जिसके लिए हम एक पैराग्राफ के द्वारा समझने का प्रयाश करेंगे ।

आज के हमारे भारत में नई शिक्षा निति में बहुत सारी कमियां हैं जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता हैं।

In today’s India, there are many drawbacks in the new education policy which cannot be ignored.

जो बच्चे सुरुवाती दिनों में क्रिकेट या फूटबाल सीखते हैं उनमे बहुत सारी कमियां होती ही है जो समय के साथ – साथ ठीक किया जाता हैं जिससे वे बाद में अपने देश के लिए बढ़िया प्रदर्शन कर सकें।

Children who learn cricket or football in the early days have many drawbacks which are corrected over time so that they can perform well for their country later.

  • kamiya meaning in hindi

इसका हिंदी में मतलब खोट , न्यूनता ,अभाव , कमी , घाटा , नुक्सान , आदि होता हैं ।

नई शिक्षा नीति की कमियां

केंद्र सरकार ने साल 2017 में इसरो के पूर्व प्रमुख कस्तूरी रंगन  के साथ अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था  जिसने भारत के लिए एक नई शिक्षा नीति तैयार करने की बात राखी गयी थी ।

इसके बाद इस समिति ने 1 जून, साल 2019 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अपनी एक रिपोर्ट तैयार किया जिसमे नयी शिक्षा के विषय में यह  निबंध में पढ़िए कि नए शिक्षा निति २०२० में कहाँ और क्या कमियाँ हैं

भारत जैसे विशाल देश के लिए एक समान शिक्षा नीति को सामान्य रूप से लागू करना बहुत ही मूर्खता भरा निर्णय है। 130 करोड़ की आबादी वाले देश में केंद्रीय नीति कैसे सफल हो सकती है, जो दुनिया में अपनी विविधता के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है।

भारत में मुख्य रूप से चिकित्सा ,उच्च शिक्षा विभाग,  और कानूनी विभाग को छोड़कर, को संभालने के लिए चार विभाग होंगे|इतने सारे संगठन होने के कारण  प्रशासनिक परेशानी और भ्रष्टाचार बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में कोई एक संघठन दूसरे से सहमत नहीं होगा तब उस परिस्थिति में क्वी समय की बर्बादी होने के साथ फैसले लेने में देरी भी हो सकती है |

यदि संस्कृत की बात करे तो 2020 नई शिक्षा निति में जरुरत से ज्यादा ध्यान दिया गया है । भारत का संविधान मुख्य रूप से 22 भाषाओं को मान्यता देता है और वैसे भी संस्कृत के लिए हमारे देश में 6 विश्वविद्यालय मौजूद हैं।

जबकि, 2011 की जनगणना यह पाया गया की मात्र  24821 लोगों ने संस्कृत को अपनी मातृभाषा के रूप अपनाया है । इतनी कम लोगों के होने के बावजूद  संस्कृत के लिए पिछले 3 वर्षों में 643 करोड़ खर्च किए गए हैं। जबकि इसी में शामिल अन्य भाषा तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, उड़िया सहित पांच शास्त्रीय भाषाओं पर केवल 29 करोड़ रुपये खर्च किए गए?

nai siksha niti ki kamiyaanजारी है —(kamiya meaning in english-kamiya in english-नई शिक्षा नीति 2020 की कमियां)

इस नयी शिक्षा नीति में यह कहा गया है की सभी सरकारी और गैर सरकारी उच्च शिक्षा देने वाले इंस्टिट्यूट पर एक जैसे नियम लागू होंगे | लेकिन यह स्पष्ट नहीं बताया गे की इसमें आईआईटी ,केंद्र विद्यालय स्कूल, आईआईएम, सैनिक स्कूल, एनआईटी आदि शामिल हैं या नहीं |

अधिकांश छात्र विदेश में काम करने जा रहे हैं, तो लोगों के द्वारा भरा गया टैक्स का उपयोग क्यों किया जाता है | सुधारke लिए  पढ़ने वाले छात्र पर कम से कम 3 या 5 साल की सेवा की आवश्यकता वाले नियमों जरूर लागू करना चाहिए जिस तरह से  एएफएमसी में दाखिला लेने वाले मेडिकल के विद्यार्थियों के लिए यह नियम अनिवार्य है ।

नयी शिक्षा नीति में यह बताया गया है की पांचवी क्लास तक यदि पडाहै को मातृभाषा में करवाई जाए तो बच्चों का दिमागी विकास ठीक से होता है और उसके बाद शिक्षा का माध्यम चुनने का अंतिम फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है|

इसे समझना जरुरी है की मान लीजिये की कोई बच्चा जो दक्षिण भारत का है वह 4 क्लास तक वहां पढता है और उसके बाद उसके फादर का तबादला उत्तर भारत में हो जाए तो वह आगे की पढ़ाई की भाषा में करेगा क्योंकि उसने तो अभी तक तेलगु , कन्नड़ और तमिल भाषा ही जाना है ।

नई शिक्षा निति की अच्छाइयां 

1 ) स्कूली शिक्षा में प्रारंभिक शिक्षा के दौरान बच्चों के पढ़ाई पर अधिक जोर न देकर खेलकूद और अन्य गतिविधियों के जरिये शिक्षित किया जाए। बच्चों के बस्तों का वजन भी कम करने के लिए पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव किया जाएगा।

2 )  विदेशों की तर्ज पर भारतीय शिक्षा नीति में पहली बार बच्चों को वोकेशनल प्रोग्राम के लिए तैयार किया जाएगा जिससे बच्चे यदि किसी वोकेशनल गतिविधि में रुचि रखते हो तो वे कक्षा 6 से ही इंटर्नशिप में जा सकेंगे। वोकेशनल कोर्स के उदाहरण के रूप में कारपेंटर, प्लंबर, पेंटिंग आदि शामिल है ।

3 ) बच्चो को सीखने में बहुत आसानी हो इसके लिए उन्हें पांचवी तक स्थानीय भाषा में पढ़ाई का प्रावधान किया गया है।

4 ) नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम में कुछ इसतरह सुधार किए जाएंगे ताकि रट्टू तोता की जगह उहे सीखने पर ज्यादा जोर दिया जाए ।

5 ) एक विशेष बदलाव के रूप में कक्षा 9 से विद्यार्थी को अपने पसंद के विषय का चुनाव कर पाएंगे क्योंकि एक उन्नत शिक्षा जगत में इसकी जरुरत बहुत ज्यादा थी। स्टूडेंट एक विशेष माध्यम में अपने सभी विषयों से संतुष्टि प्राप्त नहीं कर पाता था।

6 ) शिक्षकों के स्तर को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय प्रोफेशनल डिग्री तैयार किए जाएंगे जिसके वजह से अध्यापकों के अध्यापन की गुणवत्ता में सुधार होगा । इस वजह से  विद्यार्थी के स्तर में वृद्धि होना लाजमी है।

7) बच्चों का मूल्यांकन अब एक स्वतंत्र एजेंसी करेगी और इससे पहले यह कार्य एक ही संस्था किया करती थी जिसमे  मूल्यांकनकर्ता, नियंत्रक , संचालक,  सभी शामिल होते थे। इसमे निष्पक्षता का अभाव रहता था।

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