types of transformer and transformer kis siddhant par karya karta hai

types of transformer in hindi

जरुरत के हिसाब से ट्रांसफार्मर का भी उपयोग अलग – अलग प्रकार से किया जाता है जैसे विधुत उत्पादन , वितरण , विभाजन आदि  आज हम इसी के प्रकार के बारे में डिसकस कर्नेगे और types of transformer को अच्छे से समझने की कोसिस करेंगे । ट्रांसफॉर्म बहुत तरह के होते है एवं उनमे से जो मुख्या है वो इस प्रकार है ।

  1. distribution transformer
  2. step up  transformer
  3. step down transformer
  4. power transformer
  5. instrument transformer
  6. current transformer
  7. potential transformer
  8. single phase transformer
  9. three phase transformer

ट्रांसफार्मर के सिद्धांत

यह म्यूच्यूअल इंडक्शन के सिद्धांत पर कार्य करता है अथार्थ ट्रांसफार्मर के अंदर दो वाइंडिंग की गयी होती है जिसमे पहला winding (emf) electro motive force और दूसरा वाइंडिंग magnetic field के रूप में कार्य करता है । कहने का मतलब यह है की जब हम ट्रांसफार्मर के पहली वाइंडिंग में ac करंट की सप्लाई देते है तो इस कोइल में electromagnetic field का निर्माण होता है

जिससे इसके चारो ओर चुम्बकीय क्षेत्र बन जाते है और वही दूसरी वाइंडिंग इसके समपर्क में आ जाता है जिसके कारण उसके अंदर से इलेक्ट्रान बहने लगते है एवं हमे दूसरी वाइंडिंग coil के सिरे से convert की हुई ac की सप्लाई मिल जाती है ।

यह सिद्धांत इतना पॉवरफुल है की बिजली से समन्धित हर क्षेत्र में transformer का इस्तेमाल होता है कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है इसके बिना किसी भी एलेक्ट्री कार्य को पूरा नहीं किया जा सकता है लेकिन ये बात सच है की किसी क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले ट्रांसफार्मर एक समान नहीं होते है एवं अलग -अलग क्षेत्र में इसकी भी बनावट और अकार भिन्न – भिन्न होती है और आज हम what are the types of transformer के बारे में बात करेंगे ।

transformer in hindi(types of transformer in hindi)

 

ट्रांसफार्मर क्या है ?

यह एक ऐसा इलेक्ट्रिक कम्पोनेनेट है जो energy को बिना लोस्स किये अल्टरनेटिव  करंट के वोल्टेज को कम या ज्यादा करने में सक्षम होता है चूँकि यह ac के वोल्टेज को कम या ज्यादा करता है इसलिए इसे प्रत्यावर्ती वोल्टेज भी कहते है । सन 1831 में माइकल फैराडे और जोसफ हेनरी ने दुनिया के सामने ट्रांसफार्मर के सिद्धांत कोपेश किया था । ( ट्रांसफार्मर को हिंदी  में परिणामित्र कहते हैं )

यदि हम इसे सिंपल भासा में समझने की कोसिस करे तो हमे यह कह सकते है की dc voltage में इस्तेमाल होने वाली तमाम डिवाइस जैसे , एम्पलीफायर , टीवी , रेडियो , चार्जर ,  आदि के सर्किट को रन करने के लिए हमे 12 volts  dc की अवसायकता होती है और इसके लिए हमे ac को dc में कन्वर्ट करने के लिए ट्रांफॉर्मर की जरुरत पड़ती है एवं इस  समस्या का समाधान हमारा ट्रांसफार्मर सॉल्व कर देता है ।

इसके एक साइड पर  ac 220 वोल्टस की सप्लाई देने पर इसके दूसरे छोर से अपने जरुरत के अनुसार या 12volts ac को प्राप्त करते है और इसमें रेक्टिफिएर की मदद से इस 12volt ac को 12volts dc में कन्वर्ट कर लेते है जिससे हमारे डिवाइस यानि एम्पलीफायर , टीवी , रेडियो आदि 12v dc को प्राप्त कर चलने लगती है ।

  • step up transformer in hindi

step-up-transformer-in-hindi

इस टाइप के ट्रांसफार्मर में इनपुट वोल्टेज लौ रहता है लेकिन इसके आउटपुट में हाई वोल्टेज और हाई करंट को प्राप्त कर सकते हैं इसके अंदर की स्ट्रक्चर की बात करे तो इसके प्राइमरी कोइल वाइंडिंग की संख्या सेकेंडरी कोइल के मुक़ाबले कम होती है जिससे हमे इसके आउटपुट पर हाई वोल्टेज या हाई करंट की प्राप्ति होती है ।

  • step down transformer in hindi (types of transformer in hindi)

step-down-transformer-in-hindi 

 

इस तरह के ट्रांसफार्मर में इनपुट वोल्टेज हाई रहता है लेकिन इसके आउटपुट पर लौ वोल्टेज और लौ करंट को प्राप्त किया जाता है इसके अंदर में प्राइमरी कोइल की संख्या सेकेंडरी कोइल के मुक़ाबले ज्यादा होती है या हम यह ये भी कह सकते है की step up transformer के ठीक उल्टा होता है । इसलिए इसके आउटपुट पर कम वोल्टेज या कम करंट की प्राप्ति होती है ।

  • power transformer in hindi

power-transformer-in-hindi

एक ही समय पर बहुत सारे उपभोक्ता को बिजली वितरण नहीं किया जा सकता है इसलिए चरण दर चरण बिजली को अलग – अलग ट्रांसफार्मर की मदद से उपभोक्ता तक पंहुचा दिया जाता है । पावर ट्रांसफार्मर का उपयोग हाई वोल्टेज नेटवर्क ट्रांसमिशन के लिए किया जाता है इसकी रेटिंग 400kv , 110kv , 200 kv आदि होती है एवं कही कही  जरूरत के हिसाब से इसका मान कम या ज्यादा  हो सकता है ।

ट्रांसमिशन सेक्शन में बहुत हाई वोल्टेज की उपस्थिति होने के कारण इसे डायरेक्ट उपभोक्ता को सप्लाई देने से पहले इसको step-down ट्रांसफार्मर के द्वारा इसके वोल्टेज को डाउन किया जाता है इसके मुख्यतः दो फायदे होते है एक की जगह – जगह वोल्टेज को बूस्ट करके ऊर्जा  खपत को बचाया जाता है और दूसरा उपभोक्ता के बिजली इस्तेमाल  के दौरान वोल्टेज का ज्यादा उतर – चढ़ाव नहीं होता है ।

  • instrument transformer 

इस तरह के ट्रांसफार्मर को isolation transformer के नाम से भी जाना जाता है जिसका उपयोग करंट के साथ – साथ वोल्टेज लेवल को भी बदलने के लिए किया जाता है ।  सेकंडरी वाइंडिंग को सुरक्षित रखने के लिए इसके प्राइमरी में मीटर एवं रिले का उपयोग किया जाता है जिसके कारण सेकंडरी वाइंडिंग को क्षति पहुंचने से बचाया जा सके । इसे दो भागो में बाटा गया है –

  1. current transformer 
  2. potential transformer 

current and potential transformer 

  • current transformer in hindi 

current-transformer-in-hindi 

 

हाई वैल्यू करंट को लोअर करंट में कन्वर्ट करने वाला सबसे महत्ववूर्ण डिवाइस है जैसा की हम ऊपर  step-up transformer के बारे में पढ़ चुके हैं की वोल्टेज के बढ़ने पर करंट की वैल्यू कम हो जाती है इसी तरह इसमें एम्पेयर की वैल्यू डाउन हो जाती है । इसके प्राइमरी इंडिंग्को सीरीज में मैन सप्लाई के साथ डायरेक्ट जोड़ा जाता है और बहुत सारे नापने वाले यंत्र जैसे की एम्पेयर मीटर , वाल्ट मीटर , वाट मीटर आदि को लगाया जाता है

ताकि एक्यूरेट रेश्यो को सेकंडरी साइड में पाया जा सके ।अब एक उदहारण से समझते है की 2000:5, इसका मतलब यह है इसके CT में 5 एम्पेयर का आउटपुट होता है जब प्राइमरी का करंट का मान 2000 एम्पेयर होगा । current transformer की accuracy और factor उसमे लगने वाली बर्डन, लोड, तापमान, चरण परिवर्तन, रेटिंग,  आदि जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।

  • potential transformer in hindi 

इसको वोल्टेज ट्रांसफार्मर के नाम से भी जाना जाता है इसका प्राइमरी वाइंडिंग को हाई वोल्टेज के साथ जोड़ा और इसके दूसरे छोर यानि सेकेंडरी वाइंडिंग में तमाम सारे मापने वाले यंत्र लगे होते है । potential transformer का मुख्या काम वोल्टेज को step-down के दवारा कन्वर्ट करके उसको सुरक्षा प्रदान करना एवं वैल्युएबल बनाना होता है । सुरक्षा की दृस्टि से इसके प्राइमरी वाइंडिंग को ग्राउंड कर दिया जाता है ।

एक उदहारण से समझते है , इस तरह के ट्रांसफार्मर का प्राइमरी से सेकंडरी का रेश्यो 500:120 है । इसका मतलब यह हुआ की जब हम प्राइमरी में 500 volts पैर सेट करेंगे तो तो यह हमे आउटपुट पर 120 volts  प्रदान करेगा एवं अलग – अलग तरह के potential  tranformer यह मान भिन्न रहेगा ।

  • single phase transformer in hindi 

single-phase-transformer

यह एक स्थिर डिवाइस है जो माइकल फैराडे के नियम म्यूच्यूअल इंडक्शन के सिधान पर काम करता है । इसमें एक ही कोर पर दोनों वाइंडिंग यानी की primary और secondry coil की वाइंडिंग की हुई रहती है एवं इस तरह के ट्रांसफार्मर का उपयोग ज्यादातर वोल्टेज या कर्रनेट का मान step-down करने के लिए किया जाता है । जिस वाइंडिंग में सप्लाई दी जाती है उसे प्राइमरी और सेकंडरी में लोड को कनेक्ट किया जाता है ।

  • three phase transformer  in hindi(types of transformer in hindi) 

three-phase-transformer

इस प्रकार के ट्रांसफार्मर में तीन प्राइमरी और तीन सेकेंडरी वाइंडिंग किये जाते है जिसका सबसे बड़ा फायदा यह है की एक सिमित साइज में और तीन सिंगल फेज क्षमता वाले ट्रांसफार्मर का लाभ एक में ही मिल जाता है । इसका सबसे ज्यादा उपयोग इंडस्ट्रीज , ट्रांसमिशन लाइन आदि में किया जाता है एवं यह इनस्टॉल करते वक़्त बहुत ही कम जगह  का उपयोग करता है और इसे बनाने में भी काफी कम लगत की पूंजी लगती है ।

Transformer ki dakshata kitni hoti hai

किसी ट्रांसफार्मर सेकंडरी में प्राप्त की गयी ऊर्जा और प्राइमरी में दी गयी ऊर्जा के अनुपात को transformer ki dakshta कहते है । यह अनुपात 100 होना चाहिए लेकिन आइडल ट्रांसफार्मर में यह 65 से 90 के अनुपात में होता है ।

conclusion(types of transformer in hindi)

उम्मीद करता हु की आपको इस आर्टिकल की मदद से what is transformer in hindi के बारे में समझ आ गया होगा और आप ऊपर दिए इसक सारे टाइप्स को भी बड़े आसान भासा में समझ गए होंगे जो की मैंने इसमें बहुत ही सिंपल लैंग्वेज में समझने की कोसिस की है और भी इसी तरह के दूसरे जानकारी जिसे आप जानने चाहते है हमे जरूर बताएं ताकि मै आपका हर संभव हेल्प कर सकू धन्यवाद ।

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