amplifier in hindi- एम्पलीफायर इन हिंदी

amplifier in hindi

what is amplifier in hindi- एम्पलीफायर क्या है ?,एम्पलीफायर क्या होता है

एम्पलीफायर में ज्यादातर ट्रांजिस्टर का उपयोग होता हैं तो transistor के थोड़े इतिहास के बारे जान लेते हैं , amplifier का उपयोग 1907 में ही सुरु होगया था तब vaccum tube के जरिये किसी सिग्नल को amplify किया जाता था

जैसे समय गुजरा इसमें भी बदलाव आते गए और इन्ही सुधार के गुंजाइस को पूरा करने के लिए तीन वज्ञानिक की बूढी क्षमता से John Bardeen, Walter Brattain और William Shockley ट्रांजिस्टर का अविष्कार किया गया

तब से लेकर आज तक इसके कइयों किस्मे दुनिया भर में पाए जाने वाले तमाम इलेक्ट्रिक सर्किट में देखने को मिलते हैं और इसके मदद से केवल amplifier ही नहीं और भी बहुत सारे डिवाइस में इसका उपयोग होता है

एंपलीफायर क्या है   यह  ट्रांजिस्टर और दूसरे इलेक्ट्रिक पुर्जो से मिलकर बना एक ऐसा डिवाइस है जो किसी भी तरह के कमजोर सिग्नल को एक्सेप्ट करके वापस उसी सिग्नल को पहले के मुक़ाबले कोई गुना ज्यादा स्ट्रांग बनाकर हमे output में प्रदान करता हैयदि हम सिंपल भासा में बात करे तो यह किसी कमजोर सिग्नल को मजबूत सिग्नल में कन्वर्ट करने में माहिर है ।

वैसे ही हम जब इस amplifier में किसी कमजोर सिग्नल को भेजते है तो हमे आउटपुट पर बहुत स्ट्रांग सिग्नल मिलता है ।लेकिन सिर्फ अंतर दोनों में यह है की फल पाने के लिए हमे कुछ महीनो का वेट करना पड़ता है जबकि amplifier के द्वारा स्ट्रांग सिग्नल तुरंत मिल जाता है 

transistor as an amplifier in hindi

amplifier को सिद्ध करने के लिए हम एक सर्किट को बनाना सीखेंगे जिसको बनाने के लिए हम ट्रांजिस्टर का मदद लेंगे और कुछ इलेक्ट्रिक पार्ट्स की भी मदद लेंगे यदि आपके पास नहीं है तो इसे मार्किट से माँगा कर प्रैक्टिस जरूर करियेगा ।

ध्यान देनेवाली बात यहाँ यह है की ट्रांजिस्टर को लगते समय उसके पिन को चेक जरूर करे नहीं तो जरा सा भी मिस्टेक होने पर हमारा पूरा सर्किट शार्ट हो सकता हैं ।

amplifier बनाने के लिए जरुरी इलेक्ट्रिक्स पार्ट्स ( छोटा एंपलीफायर)

  • 9 volts battery
  • small speaker
  • bc547 transistor
  • 47uf / 12 volts capacitor
  • 2 kilo ohms resistance

5 वोल्ट एम्पलीफायर सर्किट कैसे बनाये ?

transistor-as-an-amplifier-in-hindi

amplifier को बनाने के लिए हमे कुल 5 पार्ट्स की अवस्य्क्ता पड़ेगी अतः सबसे पहले हम स्पीकर के पहले सिरे को बैटरी के पॉजिटिव में जोड़ेंगे और दूसरे सिरे में हम रेजिस्टेंस और ट्रांजिस्टर के collector को जोड़ देंगे ।

अब हम transistor के emitter को ग्राउंड से कनेक्ट कर देंगे । अभी हमारा रेजिस्टेंस का दूसरा सिरा को कनेक्ट करना है एवं उसे हम ट्रांजिस्टर के बेस में और साथ में capacitor के पॉजिटिव छोर को को जोड़ेंगे इसतरह हमारा simple amplifier circuit  कम्पलीट हो जायेगा

अब इसे टेस्ट करना बाकी है तो इसके लिए हम सबसे पहले अपने मोबाइल के लिए एक अलग से aux cable आता है और जैसा की हम जानते है की उसमे कुल दो या तीन कनेक्शन पॉइंट दिया रहता है ।

कोई दो तार जोड़कर हम बहार निकाल लेंगे और उस दो तार को हम अपने बनाये हुए इस amplifier circuit के कपैसिटर के नेगेटिव सिरे से और ग्राउंड (gnd) से जोड़ देंगे ।

characteristics of amplifier – एम्पलीफायर की विसेस्ताएं 

  1. bandwidth :- यह एक frequency होती है जिसे एम्पलीफायर की मदद से बनाया जाता हैं
  2. noise :- output में प्राप्त की जानेवाली bad signal होते हैं । जिसे बाद में फ़िल्टर भी किया जा सकता है ।
  3. gain :- यह input-output सिग्नल का magnitude ratio होता है ।
  4. skew rate :- यह output में प्राप्त सबसे हाई rate है ।
  5. stability :- यही एक ऐसा माध्यम है जिसमे pure filter aur noisless सिग्नल को भेजने की क्षमता होती है ।
  6. efficiency :- input में दिए गए सिग्नल और output में प्राप्त सिग्नल का अनुपात होता हैं ।

types of amplifier in hindi-एंपलीफायर कितने प्रकार के होते हैं

सामान्यतः  मुख्या चार तरह के एम्पलीफायर के प्रकार है

  1. current amplifier :- कभी – कभी किसी के टाइटल से ही हमे उसके काम के बारे में पता चल जाता है , ऐसा यहाँ भी हैं अतः यह करंट को amplify करके output पर भेजता है ।
  2. voltage amplifier :- input पर दिए गए सिग्नल के वोलटेज को यह बढ़ने का काम करता है इसलिए इसे voltage amplifier कहते हैं ।
  3. transconductance amplifier :- यह एक प्रकार से input में दिए गए सिग्नल को इनपुट पर ही वोल्टेज द्वारा बढ़ने घटने पर  आउटपुट वाले सिग्नल को भी बढ़ाया या घटाया जा सकता है ।
  4. transresistance amplifier :- इसमें इनपुट पर ही करंट पर बदलाव करके आउटपुट को कम या ज्यादा किया जा सकता है ।

ऊपर दिए गए इन चार प्रकार के अलावे और भी भी amplifier के कई प्रकार है जिनके विसेसता के आधार पर अलग अलग भागो में बांटा गया है ।

  • power amplifier in hindi 

इस तरह के amplifier , input signal के पावर के magnitude को बढ़ाने में सक्षम होते है इसलिए इन्हे पावर एम्पलीफायर कहा जाता है । इसका प्रयोग rf-transmetters , speaker , headphone आदि में किया जाता हैं एवं इसे हमेशा watt (w) में मापा जाता हैं ।power amplifier भी कई तरह के होते है इसे भी हम आगे और डिटेल में जानेंगे ।

  • oparetional amplifier in hindi 

oparetional-एम्पलीफायर-इन-हिंदी

यह एक प्रकार का  integrated circuit (ic) होता है यदि आप ऊपर दिए इमेज में देखे तो पता चलता है की इसके आउटपुट तो एक ही होता है लेकिन इनपुट दो है वो भी अलग अलग है एक में non inverting input + सिग्नल को भेजा जाता है

एवं दूसरे में inverting input – को भेजा जाता है इसके अलावे दो पिन और है जिसमे इस ic को on करने के लिए सप्लाई दिया जाता है ।

advantages of oparetional amplifiers (op-amps)- ऑपरेशनल एम्पलीफायर के लाभ 

  • इसका input impidence हाई होता है ।
  • दूसरी तरफ आउटपुट पर प्राप्त इम्पिडेन्स लौ होता है ।
  • इसमें सभी प्रकार के कार्य जैसे voltage to current converter , multiplier , adderआदि करने की क्षमता होती है ।
  • gain की वैल्यू ज्यादा होती है
  • यह प्रयोग करने के लिए बहुत आसान होता है ।

 

  • valve or veccum tube amplifier in hindi 

इस प्रकार के amplifier signal के power और amplitude को बढ़ाने के लिए veccum tube एम्पलीफायर का इस्तेमाल करते हैं । यह पहले बड़े साइज में और महंगे हुआ करते थे फिर समय के साथ इसमें बदलाव आने के कारण ये ic में आने लगे और साइज में छटे होने के साथ सस्ते भी हो गए । इसका प्रयोग radar , military , uhf transimeter , high radio में किया जाता है ।

  • ट्रांजिस्टर एम्पलीफायर इन हिंदी 

यह आज के student के प्रैक्टिस करने और सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाला बहुत महत्वपूर्ण पुर्जा होता हैं । यह तीन पिनोवाला वाला जिसके अंदर सिलिकॉन और जर्मेनियम की पार्टी बिछी रहती है । इसका प्रयोग radio(rf) , ofc , audio amplifier के रूप में सबसे ज्यादा किया जाता है ।

  • klystron amplifier in hindi 

यह एक liner beam veccum tube होता हैं जिनका प्रयोग रेडियो फ्रीक्वेंसी को amplify करना के लिए किया जाता है ।

  • instrument amplifier in hindi 

जैसा की आपको नाम स ही पता चलता है की इसका प्रयोग music instrument को बनाने के लिए मकसद से ही इसे डेवेलोप किया गया है ।

  • distributed amplifier in hindi 

यह एक प्रकार से ट्रांसमिशन लाइन में उपयोग किये जाते है जो इस क्षेत्र की सिग्नल को विभाजित कर प्र्तेक सिग्नल को amplify करने का काम करते है ।

  • video amplifier in hindi 

यह सभी प्रकार के video device में इस्तेमाल किये जाने वाले power tuner होते है जो किसी भी video या image की क्वालिटी को बूस्ट करने में सक्षम होते है ।

ऊपर दिए गए सारे amplifier के रूप में प्रयोग किये जाने वाले उदहारण है दुनिया में और भी बहुत सारे एम्पलीफायर डिवाइस है जो इलेक्ट्रिक की दुनिये में बंटे अलग अलग क्षेत्र में अलग अलग amplifier device इस्तेमाल किये जाते हैं ।

types of power amplifier in hindi ( पावर एम्पलीफायर कितने प्रकार के होते हैं )

  • class A power amplifier 

इस प्रकार के amplifier collector current , signal के पूर्ण साइकिल तक फ्लो होते हैं तो इसे class a power amplifier कहते हैं । इसका मतलब यह है की collector current signal में पुरे चक्र में सिग्नल को एम्प्लिफाई करते रहते है । इसे हम high power amplifier में इस्तेमाल नहीं कर सकते है एवं यही इसका सबसे बड़ा disadvantages है ।

class-A-power-amplifier 

  1. यह बहुत ही सिंपल डिज़ाइन का होता हैं ।
  2. इसमें low level distoration की सुविधा पायी जाती है ।
  3. यह एक स्थिर टाइप का होता है ।
  4. high linearity की फंक्शन होती है ।
  • class B power amplifier 

इस तरह के एम्पलीफायर वे होते है जो collector current , input signal के half cycle तक ही बहते है अतः इसे class B power amplifier कहते हैं ।

class-B-power-amplifier 

  1. इसमें दो तरह के ट्रांजिस्टर का प्रयोग  किया जाता है जिसमे एक पॉजिटिव और दूसरा nagetive cycle के लिए होता है ।
  2. इसकी efficiancy की अधिकता होती है ।
  3. heating output कम होती है ।
  4. stable और reliable दोनों में सक्षम है ।
  5. 0.7 वोल्टस को मिलते ही यह अपना काम करना सुरु कर देता हैं ।
  6. इसमें एक पूरी cycle दो half cycle से पूरी होती हैं ।
  • class AB power amplifier 

class-AB-power-amplifier

  1. इसे आप नाम से ही पता लगा सकते है की यह class a और  class b power amplifier के कॉम्बिनेशन से बना होता है । इसमें दो ट्रांजिस्टर का उपयोग किया जाता है लेकिन डॉन को एक ही साथ on किया जाता है ।
  2. इसमें दो ट्रांजिस्टर एक साथ काम करते है ।
  3. इस पद्धति में class A और class B power amplifier के गन पाए जाते हैं ।
  4. power efficiant की क्षमता 50 से 60 % तक ही होती हैं ।
  • class C power amplifier 

जब collector current , input signal के अर्ध चक्र से भी कम फ्लो होने लगता है तो इसे class C power amplifier कहते हैं ।

class-C-power-amplifier 

  1. इसमें सबसे कम लीनियर होते हैं ।
  2. यह लगभग 80 से 90% तक सबसे ज्यादा एफिशन्ट होता है ।
  3. tuned एवं untuned इसके दो मुख्यतः operating modes होते हैं ।
  4. इसका power consumption की खपत बहुत ही काम होती है ।

और अंत में हमारे पास class D power amplifier ही जो ऊपर दिए चार में इसे सम्मिलित नहीं किया जा सकता है आइये इसके बारे में भी जानकारी हासिल करते हैं ।

  • class D power amplifier 

यह एक प्रकार का non-linear switching  amplifier है । इसमें दो transistor linear gain device के लिए स्विचन का काम करते हैं । यह analog signal को digital via pulse width modulation में बदलने के लिए सक्षम होते हैं

class-D-power-एम्पलीफायर

  • motor controller के  रूप में इसका  उपयोग होता है
  • audio power amplifier में भी इसे इस्तेमाल किया जाता हैं
  • इसकी एफ्फिसिएन्सी 100% तक हो सकती है
  • कम बिजली खपत और कम पावर कोन्सुम्प्शन के लिए यह अनुकूल होता है
  • अन्य power amplifier के मुक़ाबले यह काफी जटिल होते हैं

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