diode applications – डायोड ऍप्लिकेशन्स क्या है वर्किंग इन हिंदी

diode applications – डायोड ऍप्लिकेशन्स क्या है वर्किंग इन हिंदी

diode दो सिरों वाला एक इलेक्ट्रिक कम्पोनेनेट हैं  जिसके पहले सिरे को anode और दूसरे को  cathode के नाम से संबोधित किया जाता हैं । ये डायोड अधिकतर semiconductor material से बने होते है, जैसे की जेर्मेनियम , सिलिकन सेलेनियम आदि की बानी होती है । ये parts दिखने में तो छोटे नजर आते है लेकिन काम बहुत बड़े होते हैं , diode का उपयोग हम rectfiers , voltage regulator , switches . signal modulators , oscillator , के रूप में इस्तेमाल किया जाता हैं । 

यह इलेक्ट्रिक करंट को सिर्फ एक ही दिशा में जाने की अनुमति देता है जब हम इसके एक छोर anode को किसी पॉजिटिव वोल्टेज से और दूसरे छोर cthode नेगेटिव वोल्टेज से जोड़ते है तो इसमें current बहने लगता है जिसे हम forward baising कहते हैं। जब हम ठीक इसके उल्टा यानी diode का कैथोड हम पॉजिटिव  से और एनोड सिरा नेगेटिव से जोड़े दे तो इस समय कोई भी करंट एक छोर से दूसरे छोर में प्रवाहित नहीं होगी जिसे riverse biasing कहते है। 

यदि हम प्रैक्टिकल के द्वारा forward bias और reverse bias को समझना चाहे तो क्या ये पॉसिबल है , तो जवाब है हैं हाँ निचे दिए गए दो इमेज से हम बड़े आराम से इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । आइए forward bias diode और reverse bias diode के बारे में समझे :-

forward bias diode – reverse bias diode 

forward bias  diode :-  इसे सिद्ध करने के लिए हमे जो चार  सामने की जरुरत होगी वो हैं , तार, बैटरी , led लाइट , डायोड । सबसे पहले हम एक तार की मदद से डायोड के anode सिरे को बैटरी के पॉजिटिव में जोड़ देंगे । अब हम डायोड के cathode सिरे को led के positive सिरे में जोड़ेंगे ।battery के नेगेटिव सिरे को led के नेगेटिव में जोड़ेंगे आप चाहे तो यहाँ पर एक स्विच भी लगा सकते हैं । अब हमे जो रिजल्ट प्राप्त होगा वो forward bias कहलायेगा क्योंकि इस समय मेरा LED जल चूका है ।diode-applications

reverse bias diode  :- इसको prove करने के लिए हमे वही  चार सामान की जरुरत पड़ेगी , तार , बैटरी , led लाइट , diode  आदि । यहाँ पर हम diode के cathode  सिरे को बैटरी के positive से जोड़ेंगे और इसके anode  सिरे को led के positive से जोड़ देंगे फिर इसके बाद हम बैटरी का negative सिरे को हम led लाइट के नेगेटिव से जोड़ देंगे । इस समय यदि आप ध्यान दे तो यहाँ पर हमे सिर्फ डायोड को सिर्फ प्लाट दिया है बाकी सब सेम हैं । हम निचे यदि पिक्चर पर गौर करे तो हमारा लाइट नहीं जल रहा है इसे हम reverse bias कहते हैं ।

diode-applications

diode ka itihas (diode applications)

जॉन एम्ब्रोज़ फ्लेमिंग ने १९०४ में अपना पहला thermal diode पेटेंट कराया था तब vaccums tubes सबसे ज्यादा use होता था इसका उपयोग सभी इलेक्ट्रिक कार्यो जैसे रेडियो,टेलीविज़न,ध्वनिप्रणालियाँ,आदि में था। 1940 अंत में सेलेनियम डायोड के आ जाने से इनका बाजार धीरे धीरे कम होने लगा। 1960 में जब बाजार में semiconductor diode का आगमन हुआ तब इनका चलन बहुत काम हो गया आज भी इसका उपयोग वहा होता है  जहा बहुत ज्यादा वोल्टेज या धारा की अवस्य्क्ता हो। 

diode का parallel में इसलिए लगाते है क्योंकि एक सर्किट से दूसरे सर्किट में उसी धरा को प्रवाहित हो जिसको हमे चिन्हित किया चाहे वो forward bias हो या revers bias हो ।

battery charge करते समय diode इसलिए गर्म होता है क्योंकि उसमे इलेक्ट्रान की बहने की गति तेज रहती है ।

डायोड कितने प्रकार के होते है – diode kitne parkar ke hote hai 

1 . zener diode 

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zener diode का अविष्कार 1934 में clarence zener ने किया था जो की एकदम आनेवाले वोल्टेज pulses से बचने के लिए किया गया था । यह एक वोल्टेज रेगुलेटर की तरह काम करती है जैसे में सभी डायोड की तरह करंट को एक दिशा में जाने देता है लेकिन जैसे ही जब वोल्टेज breakdown voltage से ज्यादा हो जाती हैं तो यह करंट को उलटी दिशा में भेज देता है ।

2. light emiting diode

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यह electric energy को light एनर्जी में बदलने के काम करती है और इसको 1968 में दुनिया के सामने लाया गया था । इसमें जब सही से सप्लाई दी जाती है तब इसमें light पैदा होती है वो भी electroluminescene के कारन होल्स और एलेक्ट्रोन्स आपस में दुबारा जुड़कर लाइट की फार्म में एनर्जी पैदा करते है । पहले इसका उपयोग inductor lamp में किया जाता था लेकिन आज के समय में पुरे दुनिया में बड़े पैमाने में इसका उपयोग होया है । यह केवल forward bias के सिद्धांत को ही पालन करता है । 

3 . constant current diode 

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यह डायोड मुख्यता regulating diode . current limted diode या diode connector transistor के नाम से भी जाना जाता हैं यह वोल्टेज को किसी विषेस करंट पर नियमित रखता है ।

4 . schockley diode 

यह पहला लेयर यानी pnpn जंक्शन वाला डायोड था जोस्का अविष्कार 1950 के दसक में  विलियम शॉकलेय द्वारा बनाया गया था

5 . schottky diode(diode applications)

यह semiconductor और धातु के मटेरियल के द्वारा बनाई गयी थी जो जर्मनी के फिजिक्स्त walter h .  schottky ने बनाया था यह बहुत तेज़ स्विचन का काम करती हैं और बहुत ही कम मात्रा में वोल्टेज को खरच करती है चूँकि इसमें धातु का भी उपयोग होता है इसलिए ज्यादा से ज्यादा करंट को बहने देती है

6 . photo diode

photo diode  लाइट को electric current में बदलने के काम करती है ऐसा समझा जाता हैं की यह light emting diode के ठीक उल्टा काम करती हैं इसका रिस्पांस टाइम बहुत ही काम होता है । solar power में इसका उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है ।

7 . tunnel diode (diode applications)

1957 में leo esaki द्वारा इसका अविष्कार किया गया था ासको इसकी diode भी कहते है ।जहाँ पर कार्य को नैनो सेकंड  में करवाना हो वहां पर अतार्थ बहुत तेजी से switching करवाना हो इसका इस्तेमाल किया जाता है । इसका उपयोग oscillatory circuits , microwave circuits , resitant to nuclear radiation में किया जाता है

8 . varactor diode 

varieble capacitor की तरह या डायोड  काम करता है और revrse bias state में अच्छा रिजल्ट देता है किसी भी सर्किट की स्थिर वोल्टेज कcapacity के वैल्यू को काफी ज्यादा करने में सक्षम होता है इसलिए इसका इस्तेमाल satellite , mobile phone , में voltage controller या oscillator के रूप में किया जाता है

9 . laser diode (diode applications)

इसको LD या injection laser diode के नाम से भी जाना जाता है इसक कार्य light emitting diode की तरह है लेकिन यह लाइट की जगह light beam को बनता है इसका उपयोग laser pointer , cd , laser printing , laser scanning आदि में किया जाता है ।

दोस्तों हम आपसे यह उम्मीद जताते है की यह पोस्ट जिसे काफी मेहनत लगा हाउ आपको पसंद आये होगा । कृपया इस पोस्ट के अच्छे और खराब पॉइंट के बारे में भी हमे coomments के माध्यम से बत्ताए ताकि हम उसे ठीक करसके जिससे आपको पढ़ने में और आसानी हो  और मेरी गलती को सुधरने का भी मौका मिल सके धन्यवाद ।

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